ज़िन्दगी के पन्ने

जिंदगी  के  पन्नो  को  पलटते  देखा है.....2
कुछ  और नहीं वक़्त  पे  करवटे  बदलते  देखा  है........
मौसम    की   तरह  रंग  बदलते  देखा है .....   

जिंदगी  के  पन्नो  को  पलटते  देखा है.....2
जिसे  वक़्त  के आगे   झुकते  देखा  है  .....
अनमोल  है  जो  मेरे  जीवन   मे ......२
उन्हें   बेमोल   बिकते  देखा  है ........
अपने  झूठी  असूलो  की  खातिर....

कई  रिस्तो को  तोरते  देखा है .......
खुद   जीवन  मे तनहा  है  जो .....२
उन्हें   दूसरो   को तन्हा   करते   देखा है....
ज़िन्दगी  की  सच्चाई  को ....
 बेबस  और  लाचार   देखा  है ....
जिंदगी  के  पन्नो  को  पलटते देखा है.....2
      कुछ  और नहीं वक़्त  पे  करवटे  बदलते  देखा  है........

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