एक बार उन्होंने पूछा था एक बात -२
क्या हो ? तुम हो मेरी खुसी से नाराज,
हँस के हमने टाली थी वो बात
मुस्कुराकर छुपा ली थी हमने अपनी जज्बात ,
उन्हें क्या पता उनकी खुशी मेरे लिये क्या है जनाब ,
उनकी एक हंसी के ली मै दे दू अपनी जान|
महयूसी ना आने दू चेहरे पे -२
चाहे गम हो कितना ही आपार |
एक बार उन्होंने पूछा था एक बात -२
क्या हो ? तुम हो मेरी खुसी से नाराज,
मुस्कुराहट से ही उनके -२
सुरु होती है अपनी सुबह और साम ,
मुस्कुराये वो ना तो वेयार्थ है मेरा उनका साथ |
खुशी हो या गम खिल-खिलाते है हम हरवक्त ,
उनकी खुशी जी-जान से चाहते है हम हरवक्त ,
उनके लिये ही तो हम मुस्कुराते है हम हरवक्त |
एक बार उन्होंने पूछा था एक बात -२
क्या हो ? तुम हो मेरी खुसी से नाराज |
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