बारिश की बुँदे

बारिश   की  बुँदे  जब  तन  पे  परी ,
       मन  में  कुछ  ऐसी  अगन  सी  लगी ,
बचपन  वो  मेरी  शम्रती  पटल  पे  परी .
       एक  नन्हा  सा  बचपन  सामने  था   खरा   ,
ममता  की  छाओ  में  मस्त  था   परा ,
       सुध - बुध  ना  तन  की  थी  उसे  परी ,
ममता  की  विचलित  आँखे  थी  भरी ,
      बुँदे  जब  बारिश   की  तन  पे  परी ,
ममता   की  आंचल  सर  पे  परी .
      तभी  झोका  हवा  का  सपना  वो  तोरा ,
बुँदे  वो  बारिश   की , ठण्ड  से  मुझे  झंकोरा .
     खुशबू वो  भिन्नी   सी  सांसो  में  समाई   ,
भींगी  सी   परी  सामने  जब  आई  ,
    बारिश    की बूंदों   ने  एक  अजब  सी  ली  अंगराई,
तन -मन  में  जेसे    जादू  सी    जगाई  ,
     खुशियों    की  बूंदें  मुझ  पे  बरसाई  ,
बारिश   की  बुँदे  जब  तन पे  परी ,
     मन  में  कुछ  ऐसी  अगन  सी  लगी .

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