कैसे कहूँ मै उनसे मुहबत हो गई है तुम से -२
डरता हूँ इस बात से , नाराज ना हो जाये वो कही इस बात पे |
आँखे ये मेरी हर वक़त तलाशती है उनको ,
दह्र्कन ये मेरी हर वक़त पुकती है उनको ,
मन ये हर वक़त खोया रहता है उन में ,
सांसो की तरह वो समाए रहती है मुझ में |
उनकी मीठी वो बोली कोयल सी लगती है मुझ को ,
उनकी मटकती वो आँखे , दीपक की लो सी लगती है मुझको ,
उनकी मटकती वो आँखे , दीपक की लो सी लगती है मुझको ,
उनकी लहराती वो लट , पागल करती है मुझ को ,
कैसे कहूँ मै उनसे मुहबत हो गई है तुम से -२
उनकी आँखों की काजल सावन सी लगती है मुझको ,
उनके रूठने की अदा सबसे प्यारी लगती है मुझको ,
उनके गानों मै मुहबत की मीठी , राग सुनाए देती है मुझको,
उनके क्या? लायक हु मै सोचता हूँ कब से ....
कैसे कहूँ मै उनसे मुहबत हो गई है तुम से -२

0 Comments