खुशी कुछ इस कद्र छलक जाये , गम भी सारा बोर हो जाए उसमे |
जीतनी भी हो तमन्ना आपके दिल मे,
दुआ है रब से वो काबुल हो जाये |
खुशी की छाव हो कुछ इस कद्र -२
गम की परछाई भी धूमिल हो जाये |
होठो पे रहे सदा मुस्कान आपके -२
और दिल की हर अरमान पूरी हो जाये |
बरश जाये ये खुशी बादल बन के कुछ इस कद्र -२
गम इस सागर मे ही विलीन हो जाये |
जिंदगी के सपने जो देखे है आपने -2
खुदा करे मुझसे पहले कबुल हो जाये |खुशी कुछ इस कद्र छलक जाये ,
गम भी सारा बोर हो जाए उसमे |
2 Comments
Nice poem
ReplyDeletethnaks for your comment...
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