मानवता भी तार-तार होती है, जब कुकर्म की बात होती है।
ये पहली बार नहीं, जब वो चीखी है,
कभी दिल्ली, कभी मणिपुर, तो कभी बिहार में,
मानवता शर्मसार हुई है।
जब पता हो कि कुकर्म की सज़ा बस आज़ादी होगी,
क्यों नहीं ये बार-बार होगी।
मानवता हर बार शर्मसार होगी,
जब कहेंगे, "लड़का है, हो गई गलती।"
सत्ता हो या विपक्ष,
झंडे का रंग देखकर बयान करेगी,
तब तक मानवता शर्मसार होगी।
माँ जब तक अपने कुकर्मी बेटे का पक्ष लेगी,
तब तक मानवता शर्मसार होगी।
काले कोट वाले जब तक चंद रुपयों के लिए
कुकर्मी के लिए न्याय मांगेंगे,
तब तक मानवता शर्मसार होगी।
सुनकर चुप रहने वाले,
देखकर अनदेखा करने वाले रहेंगे,
तब तक मानवता शर्मसार होगी।
जब हर घर में ऐसा मानव होगा,
तब न मानवता होगी, न ही कोई शर्मसार।
तब सिर्फ एक रंग होगा धरती पर, वो भी सिर्फ लाल।
- शिवेन्द्र प्रकाश सुमन
17 /08/2024

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