ना देख कर दरवजे पर हमें , वो कभी रूठ जाया करती थी ,
आज दूर होकर भी हमसे वो मुस्कुरय करती है |
ना देख कर हंसी होटों पर मेरे वो टूट जाया करती थी ,
आज देख कर आँशु को भी मेरे , वो मुस्कुरय करती है |
आज डूब गया हूँ सोंच में तो , वो पास आने से भी डरती है |
जब भींगा करता था बरसात में , बारिस की बुँदे बन कर लिपट जाया करती थी ,
आज डूब गया हूँ गम के सागर में तो , वो दूर बैठ कर देख करती है |
ना हो जाऊ ओझल नजर से उनके , ये सोच कर डरा करती थी ,
आज ना आजाऊ उनको नजर मै ,ये सोच कर डरा करती है |
कल दूर जाने से डरा कटी थी जो
आज पास आने से डरा करती है वो ....
आज पास आने से डरा करती है वो... पास आने से डरा करती है वो |
+91-9755938443

2 Comments
very touching lines......super like
ReplyDeletevery touching lines......superlike
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