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बंद पलकों में एक तस्विर बनी थी, एक धुंधली झलक छलक रही थी , कैद करना चाहा था आँखों में .......2 पर बोझिल आँखों को होस कहा थी । मदहोस था उन…
Read moreवो रुलाते है तेरा नाम लेकर , वो हँसाते है तेरा नाम लेकर , जाने तुझे भुला क्यू नहीं देता उनका नाम लेकर | एक अलग सी कसक उठा जाती है तेरा नाम सुन कर…
Read moreकभी मौजो में ढूंढ़ता हूँ उसे , कभी बहारो में ढूंढ़ता हूँ उसे , समाए है जो मेरे रोम -रोम में , हर जगह…
Read moreपलक जब बोझिल हो जाती है नींदों से -2 जाने क्यू तू यादो में समाजाती है धीरे से , जो देखता हूँ तुझे बंद पलकों से जाने क्यू…
Read moreना देख कर दरवजे पर हमें , वो कभी रूठ जाया करती थी , आज दूर होकर भी हमसे वो मुस्कुरय करती है | ना देख कर हंसी होटों पर मेरे वो टूट जाया करती थ…
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