पलक जब बोझिल हो जाती है नींदों से -2जाने क्यू तू यादो में समाजाती है धीरे से ,
जो देखता हूँ तुझे बंद पलकों से
जाने क्यू मुस्कान आजाती है सिली होटों पे,
जो देखता हूँ तेरी मुस्कुराहट को बंद आँखों के तले -2
जाने क्यू खाबो में भी खिल - खीलाने लगता हूँ !
ना उरा इन जुल्फों को मेरी बंद आँखों के तले
सांसे छोर के उन हवाओ में घुलने लगता हूँ
जो आहट मै सुनता हूँ तेरे लबो की इन खाबो की दुनिया में
कही खाब ना टूट जाये इससे डरने लगता हूँ !
पलक जब बोझिल हो जाती है नींदों से -2
जाने क्यू तेरी यादो में खो जाता हूँ धीरे से .....
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